Sunday, September 17, 2023

स्वर

स्वर की परिभाषा – वे ध्वनियाँ जिनके उच्चारण में हवा बिना किसी रूकावट के मुँह या नाक के द्वारा बाहर निकलती है उन्हें स्वर (Swar) कहते हैं। इन वर्णों के उच्चारण में जीभ तथा होंठ परस्पर कहीं स्पर्श नहीं करते हैं। हिंदी में अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ स्वर होते हैं. हिंदी वर्णमाला में ग्यारह (11 स्वर) स्वर होते हैं। 

स्वर के भेद 

  1. 1 हृस्व स्वर
  2. 2 दीर्घ स्वर
  3. 3 प्लुत स्वर

1. हृस्व स्वर

जिन वर्णों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता है उन्हें हृस्व स्वर कहते हैं। 

हिंदी में चार हृस्व स्वर अ, इ, उ, ऋ होते हैं।  इनको लघुमूल या एकमात्रिक स्वर भी कहा जाता है। 

2. दीर्घ स्वर

जिन वर्णों के उच्चारण में हृस्व स्वरों के उच्चारण से दूगना (दो मात्रा) समय लगता है उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। 

हिंदी में आ, ई, ऊ, ए, ए, ओ, औ आदि दीर्घ स्वर होते हैं। हिंदी में सात दीर्घ स्वर होते हैं। इनको संधि एवं द्विमात्रिक स्वर भी कहते हैं।

3. प्लुत स्वर

जिन वर्णों के उच्चारण में दीर्घ स्वरों से दूगना या हृस्व स्वरों से तीन गुना अधिक समय लगता है उन्हें प्लुत स्वर  कहते हैं। 

आपने अक्सर यह देखा होगा कि कहीं कहीं राम को राऽम लिखा गया है, यहाँ “रा” और “म” के बीच में लगा हुआ निशान प्लुत स्वर को दर्शाता है। जहाँ यह निशान लगा होता है उससे पहले वाले अक्षर को उच्चारित करते समय तीन गुना अधिक समय लगता है। साधारण भाषा में कहें तो उस अक्षर को खींच कर उच्चारित किया जाता है।

स्वरों का उच्चारण स्थान

स्वरउच्चारण स्थान
अ, आकंठ
इ, ईतालु
उ, ऊओष्ठ
मूर्धा
ए, ऐकंठ – तालु
ओ, औकंठ – ओष्ठ

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