भाषा किसे कहते हैं?
‘‘भाषा वह साधन है, जिसके माध्यम से मनुष्य बोलकर, लिखकर या संकेत पर परस्पर अपना विचार सरलता, स्पष्टता, निश्चितता तथा पूर्णता के साथ प्रकट करता है।’’ या फिर सरल शब्दों में कहा जाए तो मनोभाव को व्यक्त करना भाषा है।
भाषा को हम दो रूपों में ही स्पष्टतया व्यक्त करते हैं- लिखकर अथवा बोलकर; परन्तु सांकेतिक भाषा का भी अपना महत्व हुआ करता है। यह सांकेतिक रूप कई रूपों में हमारे सामने आता है।
उदाहरण स्वरूप-
(क) विभिन्न रंगों से संकेत कर : ट्रैफिक चौराहे पर लाल और हरे रंगों द्वारा खास-खास बातें कही जाती हैं। लाल रंग ठहरने का और हरा रंग आगे बढ़ने की तरफ इशारा करता है। अस्पतालों में भी रंगों का प्रयोग देखने को मिलता है। इसी तरह विभिन्न अधिकारियों की गाड़ियों में भी रंगीन बल्बों द्वारा खास तरह की सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया जाता है।
(ख) ध्वनि-संकेत : भारी लट्ठों या वजनी सामानों को उठाने या धकेलने में ध्वनि-संकेत दिखता है। सायरन की आवाज, भोंपू की आवाज, स्कूलों में घंटी की आवाज, अग्निशामक यंत्रों की आवाज; इसी तरह मवेशियों या पक्षियों को कुछ कहने या समझाने के लिए हम ध्वनि-संकेतों का प्रयोग करते हैं। यह ध्वनि-संकेत शब्दों या वाक्यों में दर्शाए नहीं जा सकते; परन्तु इनका महत्व तो होता ही है।
(ग) आंगिक-संकेत: विभिन्न अवसरों पर हम अपने विभिन्न अंगों जैसे मुख, नाक, आँख, हाथ, ओठ, गर्दन, ऊँगली आदि द्वारा अपने मन के भाव को व्यक्त करते हैं या अभिव्यक्ति से अवगत होते हैं। इन आंगिक संकेतों के कारण ही भाषा में अंगों से संबंधित मुहावरों का प्रयोग दिखता है।
स्मरणीय तथ्य
- ‘राजस्थानी हिन्दी’ का विकास ‘अपभ्रंश से हुआ।
- ‘पश्चिमी हिन्दी’ का विकास ‘शौरसेनी’ से हुआ।
- ‘पूर्वी हिन्दी’ का विकास ‘अर्द्धमागधी’ से हुआ।
- ‘बिहारी हिन्दी’ का विकास ‘मागधी’ से हुआ।
- ‘पहाड़ी हिन्दी’ का विकास ‘खस’ से हुआ।
किसी भाषा के दो मुख्य आधार हुआ करते हैं-
- मानसिक आधार (Mental Aspect) और
मानसिक आधार से आशय है, वे विचार या भाव, जिनकी अभिव्यक्ति के लिए वक्ता भाषा का प्रयोग करता है - भौतिक आधार (Physical Aspect)
भौतिक आधार के जरिए श्रोता ग्रहण करता है। इसके सहारे भाषा में प्रयुक्त ध्वनियाँ (वर्ण, अनुतान, स्वराघात आदि) और इनसे निकलने वाले विचारों या भावों को ग्रहण किया जाता है।
जैसे- ‘फूल’ शब्द का प्रयोग करने वाला भी इसके अर्थ से अवगत होगा और जिसके सामने प्रयोग किया जा रहा (सुनने वाला) वह भी। यानी भौतिक आधार अभिव्यक्ति का साधन है और मानसिक आधार साध्य। दोनों के मिलने से ही भाषा का निर्माण होता है। इन्हें ही ‘बाह्य भाषा’ (Outer Speech) और आन्तरिक भाषा(Inner Speech) कहा जाता है।
हिन्दी भाषा पर एक नजर
बहुत सारे विद्वानों का मत है कि हिन्दी भाषा संस्कृत से निष्पन्न है; परन्तु यह बात सत्य नहीं है। हिन्दी की उत्पत्ति अपभ्रंश भाषाओं से हुई है और अपभ्रंश की उत्पत्ति प्राकृत से। प्राकृत भाषा अपने पहले की पुरानी बोलचाल की संस्कृत से निकली है। स्पष्ट है कि हमारे आदिम आर्यों की भाषा पुरानी संस्कृत थी। उनके नमूने श्रृग्वेद में दिखते हैं। उसका विकास होते-होते कई प्रकार की प्राकृत भाषाएँ पैदा हुई।
हमारी विशुद्ध संस्कृत किसी पुरानी प्राकृत से ही परिमार्जित हुई हैं। प्राकृत भाषाओं के बाद अपभ्रशों का जन्म हुआ और उनसे वर्तमान संस्कृतोत्पन्न भाषाओं की। हमारी वर्तमान हिन्दी, अर्द्धमागधी और शौरसेनी अपभ्रंश से निकली है।
हिन्दुस्तानी भाषा के दो रूप हैं। एक तो वह जो पश्चिमी हिन्दी की शाखा है, दूसरी वह जो साहित्य में काम आती हैं।
1963 ई. के अधिनियम के अनुसार भाषा-क्षेत्र
| क्षेत्र | राज्य |
|---|---|
| (क) | बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड |
| (ख) | गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, अंडमान-निकोबार द्वीप-समूह और केन्द्रशासित राज्य |
| (ग) | शेष राज्य |
No comments:
Post a Comment